Written on
Written on
Written on
Written on
Written on
Before the PFI ban, NSA Ajit Doval and Intelligence Bureau officers took the opinion of the country’s biggest Muslim organizations including those representing Deobandi, Barelvi, and Sufi sects of Islam. All these organizations were equivocal in their opinion that PFI was following a Wahhabi-Salafi agenda of pan-Islamist organizations with their extremist campaign to exploit the communal fault lines in India.
|
|
Now you calculate for yourself that if every month instead of 500 dollars they would be sending 2000 dollars, then how much money will come, and how the government will be able to put someone in jail?
|
SDPI workers are already facing many allegations of murder of Hindus in Kerala and forced conversion of Hindu girls.
Now just try to grasp how well the Govt and agencies planned and worked meticulously to take such a massive crackdown on PFI to crush the fangs of fanatic Islam
ऐसे ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए कितनी मेहनत लगती है कितना पूर्वाभ्यास करना होता है ये भी जाने एक साथ पीएफआई के लगभग 500 ठिकानों पर रेड मारना पाकिस्तान पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक जैसा ही मुश्किल काम था परंतु राष्ट्रवादी सरकार और एजेंसियों की मेहनत ने यह कर डाला। अमित शाह व अजित डोभाल जी ने दिल्ली कंट्रोल रूम से रातों जाकर इस ऑपरेशन की पूरी मॉनिटरिंग भी की।
हम आप खाने कमाने में बिजी रहते हैं परंतु देश की सुरक्षा में लगी एजेंसियां 24 घंटे देश में पनप रहे खतरों को समझने और उनके नेटवर्क को खत्म करने में लगी रहती हैं। पिछले 4-5 महीनों से पीएफआई नेता एनआईए और अन्य गुप्त एजेंसियों की निगरानी में थे। केरल पीएफआई का सबसे बड़ा गढ़ है इसलिए वहां पर विशेष ध्यान दिया गया। एनआईए अधिकारियों को पहले से ही पता था कि केरल में पीएफआई द्वारा आतंकवादी गतिविधियां फल-फूल रही हैं और इसीलिए केरल पर जोर देते हुए एनआईए व अन्य एजेंसियों के 200 अधिकारियों को यहां भेजा गया।
ये सब पिछले रविवार को केरल के कई हिस्सों में पहुंचे। उन्होंने पीएफआई नेताओं के घर और कार्यालय क्षेत्र के 1 किमी के दायरे में कमरे किराए पर लिए। कोई नहीं जानता था कि वे क्यों आए थे और उनके इरादे क्या थे। वहां से वे पीएफआई नेताओं के घरों और दफ्तरों के रास्तों पर नजर रखते हैं, नक्शे तैयार करते हैं और दिल्ली भेजते हैं।
वहां से अनुमति मिलने के बाद एनआईए, ईडी और अन्य गुप्त एजेंसियों के लगभग 200 उच्च कुशल अधिकारी केरल के कई हिस्सों में पहुंच जाते हैं और केरल के शीर्ष पुलिस अधिकारी भी यह नहीं जानते हैं। रांची से सीआरपीएफ के 10 बटालियन (750 जवान) के गार्ड 200 अधिकारियों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए सभी तरह के अत्याधुनिक हथियारों के साथ कोच्चि पहुंचे. वहां से वे कई समूहों में बंट गए और केरल के विभिन्न हिस्सों में पहुंच गए लेकिन तब तक वे नहीं जानते कि वे क्यों आए हैं।
200 अधिकारी टीमों में बंटे, 3 दिन तक लगातार मॉनिटरिंग में लगे रहे। वे यात्रा करने के लिए टैक्सियों का उपयोग करते हैं और कैब चालक को अपना सेल फोन बंद करने के लिए कहा जाता। 3 दिन की सर्विलांस खत्म होने पर दिल्ली से जानकारी दी गयी कि ये ऑपरेशन ऑक्टोपस है. उसके बाद केरल पुलिस के उच्च अधिकारियों को सूचित किया जाता है।
दूसरी ओर, गिरफ्तार पीएफआई नेताओं को दिल्ली पहुंचाने के लिए सीमा सुरक्षा बल का विशेष विमान कोच्चि एयरपोर्ट पर तैयार रखा गया. दिल्ली से रात 2 बजे ऑपरेशन शुरू करने का आदेश आता है।
रात के 3:30 बजे ये सभी 200 अधिकारी अपने ठिकानों से पास के पीएफआई नेताओं के घर और दफ्तर जाते हैं और सर्च वारंट दिखाकर तलाशी शुरू करते हैं. सुरक्षा कारणों के चलते सीआरपीएफ और लोकल पुलिस को साथ में लगाया जाता है
छापे के 4 घंटे के भीतर, विभिन्न क्षेत्रों से गिरफ्तार पीएफआई नेताओं को कोच्चि हवाई अड्डे पर लाया गया और तैयार उड़ान में दिल्ली लाया गया। भोर तक पीएफआई नेता दिल्ली में थे, इससे पहले कि केरल सरकार कोई हस्तक्षेप कर पाती।
एजेंसी ऐसे ही जाकर किसी को उठाकर नहीं ले आती, पहले पूरा होमवर्क करती है। भले ही आतंकी इस्लामिक संगठनों के लिए विपक्षी पार्टियों की छाती में दूध उतर आया हो और वे मोदी सरकार पर झूठे आरोप लगा रहे हो परंतु आपको सत्य समझना चाहिए।
|
महाभारत में कंस वध के पश्चात जब जरासंध बार बार श्रीकृष्ण पर हमला कर रहा था तो... श्रीकृष्ण बार बार उसकी पूरी सेना का सफाया कर देते थे लेकिन जरासंध को जीवित छोड़ देते थे.
कारण पूछने पर श्रीकृष्ण ने बताया कि... मैं जरासंध को हर बार जीवित इसीलिए छोड़ देता हूँ
क्योंकि, जरासंध को मारने के बाद उसकी जैसी कुत्सित बुद्धि वाले सारे स्लीपर सेल अंडरग्राउंड हो जाएंगे और फिर उन्हें खोज पाना बेहद मुश्किल होगा...
और, उसके बाद तो हम जान ही नहीं पाएंगे कि... आखिर, ऐसे लोग कहाँ कहाँ मौजूद है.
इसीलिए, मैं बार-बार जरासंध को जीवित छोड़ कर अपना काम उसे सौंप देता हूँ ताकि वो बार बार अपने स्लीपर सेल को एक्टिव करे और मैं उनके स्लीपर सेल को चुन चुन के खत्म कर दूँ ...
इस तरह मैं ऐसे लोगों का एकमुश्त रूप से सफाया कर पाता हूँ.
अब आप महाभारत के उस घटना और अभी के परिदृश्य को मिलाकर देखें तो आपको सबकुछ समझ आ जाएगा.
जब जरासंध ने शाहीन बाग में धरना प्रायोजित किया और दिल्ली में दंगे करवाये उसी समय से वो श्रीकृष्ण के राडार पर आ गया.
उसके बारे में तथ्य और सबूत जुटने शुरू हुए कि ये आखिर है क्या ???
इसके मेंबर कितने हैं, पैसे कहाँ से आते हैं , इसके नेटवर्क कहाँ कहाँ तक हैं... आदि आदि.
उधर जरासंध अपनी ताकत में मस्त था कि.... हम तो अजेय हैं क्योंकि हमको राक्षसी जरा (अल्पसंख्यक टैग) का वरदान मिला हुआ है.
हमारे साथ तो इतने कटेशर हैं... इतने देश हैं, इतनी राजनीतिक पार्टियां हैं आदि आदि.
साथ ही उनके मन में ये भ्रम भी आ गया कि... मोई सरकार इन्हें प्रेशर कुकर के सीटी की मानती है जो "उनके" प्रेशर को कम करने का काम कर रही है.
श्रीकृष्ण भी मुस्कुराते हुए ऐसे प्रदर्शित करते रहे कि.... वे तो बहुत भोले हैं और वे सचमुच में ऐसा ही सोच रहे हैं जैसा जरासंध के मन में चल रहा है.
उल्टे वे भिकास और तृप्तिकरण का घोड़ा दौड़ाते रहे.
इधर भागवत से लेकर डोवाल और मोई जी कटेशर गुरुओं के साथ मिलते रहे और सबका DNA एक बता कर सबको खीर पूरी खिलाने की बात करते रहे.
इससे जरासंध भी खुश एवं लापरवाह....
कि, हम अजेय हैं... और, हम जब जो चाहे कर सकते हैं.
लेकिन, एक दिन सुबह सवेरे पूरे देश में फैले जरासंध के नेटवर्क के 100 ज्यादा हैंडलर पूरे सबूत और डॉक्यूमेंट के साथ धर दबोचे गए.
इसके बाद फिर... एक हफ्ते तक शांति... (शायद उसे फिर से संगठित होने का समय देने के लिए ).
इससे हुआ ये कि 2-3 दिन में जब जरासंध ने समझा कि अब हमला खत्म हो चुका है तो उसने अपने छुपाकर कर रखे हुए संसाधन और लोगों को फिर से एकत्र किया..
और, अपनी ताकत का आकलन करने लगा कि अब हमारे पास क्या और कितना बचा है.
तभी ... फिर से दूसरा हमला हुआ एवं उसके दुबारा से एकत्र किए गए लोग एवं डॉक्यूमेंटस को जब्त कर लिया गया.
इस पूरी घटना में मजेदार बात यह रही कि.... जरासंध के नेटवर्क पूरे देश एवं विदेश में फैले होने के बावजूद भी कहीं से भी इसके विरोध में चूं तक शब्द नहीं निकला और न ही कोई हंगामा हुआ.
क्योंकि, ये सब करने से पहले ही भागवत और डोवाल द्वारा उनके धर्मगुरुओं को समझा दिया गया था कि.... सेम DNA होने के कारण हम तो तुम लोगों को शुद्ध घी की पूरी और दम आलू की सब्जी खिलाना चाह रहे हैं...
लेकिन, ये जरसंधवा... तुमलोगों को बदनाम कर रहा है जिसके कारण जनता हमारे पूरी सब्जी का विरोध कर रही है.
इसीलिए... तुमको पूरी सब्जी खिलाने से पहले इस जरसंधवा को बांस करना जरूरी है.
अतः, तुमलोग ध्यान रखना कि जब हम उसको बांस करें तो उसकी चिल्लाहट ज्यादा न गूंजे.
इस तरह उन दढियलों ने भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए चिल्लाहट नहीं गूंजने दिया.
और , जरसंधवा को सलीके से बांस कर दिया गया.
खैर... लेटेस्ट अपडेट ये है कि जरासंधवा पर 5 साल तक के लिए बैन लगा दिया गया है..
ताकि, उन जप्त किये डॉक्यूमेंट के आधार पर अब आराम से चुन चुन कर उनके स्लीपर सेल का दबोचा जा सके.
साथ ही.... अभी 5 साल में बहुत से यज्ञ होने हैं...
इसीलिए, धर्मरक्षक.... यज्ञ के रास्ते में आने वाले सभी संभावित रोड़े को पहले से हटा कर अपनी यज्ञ की सफलता सुनिश्चित कर लेना चाहते हैं.
पूरी कहानी का सार या है कि.... अब जरासंधवा को फाड़ कर फेंका जा चुका है और अब जरासंध महज एक इतिहास है.
और, महाभारत के युद्ध में अब जरासंध के कौरवों के पक्ष से लड़ने की आशंका ही खत्म चुकी है.
जय महाकाल...!!!
|
मोदी को मौलाना बताने वाले,
मोदी की छाती नापने वाले,
अमित शाह को नकारा निकम्मा नपुंसक गृह मंत्री बताने वाले,
सबका विश्वास और तृप्तीकरण पर तंज कसने वाले,
हर परिस्थिति में अपने नेतृत्व पर विश्वास करने वाले समर्थकों को अब्बासी हिंदू, मास्टरस्ट्रोकवादी, अंडोला आदि नामों से संबोधित करने वाले,
खुद को राइट विंगर बुद्धिजीवी/पत्तलकार बता कर हर समय मोदी/भाजपा विरोधी एजेंडा चलाने वाले कट्टर हिन्नू अल्ट्रा प्रो मैक्स पेंडुलम आज कल कहां हैं ? 🤔
ऐसे आत्मघाती पेंडुलमो को चिन्हित कीजिए और अपनी फ्रेंड/फॉलोइंग लिस्ट से तत्काल विदा कीजिए। राइट विंग को ऐसे उतावले, लिजलिजे, अल्पदर्शी, आत्मघाती, पेंडुलम लोगों की जरूरत नहीं है।
राष्ट्रवादियों ने 2014 से जो नेतृत्व चुना है वो अब तक का सर्वश्रेष्ठ नेतृत्व है। अपने नेतृत्व पर विश्वास बनाए रखिए।
|
केंद्र सरकार ने UAPA कानून के तहत PFI और उसकी 8 सहयोगी संस्थाओं पर 5 साल के लिए प्रतिबन्ध लगा दिया है.
सुबह से इस ख़बर पर तीन तरह के reaction देखने को मिलें हैं.
अब पहले वाले ठीक हैं....उनका स्टैंड clear है... ऐसे ही तीसरे वाले भी अपने स्टैंड पर clear हैं...वो कुछ घंटे कोमा में रहेंगे, फिर कोई मुद्दा उठाएंगे और छाती का नाप लेने लगेंगे.
यहाँ सबसे ख़ास हैं दूसरी प्रजाति के लोग... यह निम्न प्रश्न उठा रहे हैं.
इन्ही के लिए उत्तर देते हैं.
कुल मिला कर आपको हर बात में नुक्ताचीनी ही करनी है.. और सच मानिये इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.
PFI पर UAPA कानून के तहत प्रतिबन्ध लगा है.... UAPA से पहले POTA कानून था.... जो बीजेपी सरकार लायी थी... उस कानून को कांग्रेस ने 2004 में आते ही रद्द कर दिया था.
कल को हो सकता है कांग्रेस या और कोई सरकार आये और UAPA को रद्द कर दे... प्रतिबन्ध को रद्द कर दे.... यह सब संभव है.
अगर आजीवन प्रतिबन्ध भी लगाया जाए... तो जिस कानून के तहत वो लगा है, वही कानून अगर रद्द हों जाए तो प्रतिबन्ध भी स्वतः रद्द हो जायेगा.
ऐसे में किसकी जिम्मेदारी है कि ऐसी सरकारें सत्ता में ना आएं?? आप ही की ना??
कांग्रेस के कर्नाटक सरकार ने PFI के विरुद्ध 100 से ज्यादा case वापस ले लिए थे.... क्या आप के लिए यह महत्व नहीं रखता... क्या आपको यह नहीं दिखता??
आज कांग्रेस कई राज्यों में सत्ता में है... POTA हटाने के बाद केंद्र में सत्ता में 10 साल रही है.
इंडियन मुजाहिद्दीन आतंकवादी संगठन के आतंकियों ने batla house किया था.. जिसमें हमारे पुलिस अफसर ने बलिदान दिया था.... आज उस संगठन का मजहब के नाम पर समर्थन करने वाले, और पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चन्द्र शर्मा के बलिदान को फर्जी बताने वाले दिल्ली में सरकार बनाये बैठे हैं..... मुफ्त बिजली पानी के नाम पर. ऐसे में आप किस मुँह से उम्मीद करते हैं कि कोई आपकी सुरक्षा के लिए लड़े... आतंकवाद को ख़त्म करे...
संस्थाओ पर ban लगाए.... क्यूंकि जब सरकार चुनने की बात आती है.. तब आप आंतरिक सुरक्षा के बजाये अपने बिजली पानी के बिल या कर्जा माफ़ी चुनते हैं... ऐसे में आपको कोई भी अधिकार नहीं सवाल करने का.
~ Gaurav Pradhan
Satyagraha was born from the heart of our land, with an undying aim to unveil the true essence of Bharat. It seeks to illuminate the hidden tales of our valiant freedom fighters and the rich chronicles that haven't yet sung their complete melody in the mainstream.
While platforms like NDTV and 'The Wire' effortlessly garner funds under the banner of safeguarding democracy, we at Satyagraha walk a different path. Our strength and resonance come from you. In this journey to weave a stronger Bharat, every little contribution amplifies our voice. Let's come together, contribute as you can, and champion the true spirit of our nation.
![]() | ![]() | ![]() |
ICICI Bank of Satyaagrah | Razorpay Bank of Satyaagrah | PayPal Bank of Satyaagrah - For International Payments |
Please share the article on other platforms
DISCLAIMER: The author is solely responsible for the views expressed in this article. The author carries the responsibility for citing and/or licensing of images utilized within the text. The website also frequently uses non-commercial images for representational purposes only in line with the article. We are not responsible for the authenticity of such images. If some images have a copyright issue, we request the person/entity to contact us at This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. and we will take the necessary actions to resolve the issue.